Wednesday, August 21, 2019

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

नए मालिक चाहते हैं कि अब क़स्बे में फिर से ज़िंदगी लौटे इसीलिए उन्होंने रात में ठहरने की व्यवस्था की है. उन्होंने इसके लिए सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म रेडिट का सहारा लिया. ये सलाह लेने के लिए कि यहां और क्या कुछ किया जाना चाहिए.
एक व्यक्ति ने वहां सिनेमा हॉल बनाने का सुझाव दिया. वैसे थेरो गोर्डो में एक गिरजाघर है जिसमें एक प्रोजेक्टर की व्यवस्था है. नए मालिक इस स्क्रीन का इस्तेमाल अलग-अलग फ़िल्में दिखाने के लिए करने की योजना बना रहे हैं.
किसी ने सुझाव दिया कि अंगूर की खेती करें और बकरी पालन करें.
पिछले मालिक ने रॉबर्ट को ज़िम्मेदारी थी कि वो इस क़स्बे का ख्याल रखें, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था. नए मालिकों ने भी उन्हें केयर टेकर बना दिया है.
वो अपने तरीक़े से इस जगह का ख़्याल रखते हैं और लोग जो कचरा छोड़ जाते हैं, उसे ठिकाने लगाते हैं.
इंस्टाग्राम पर एक यूज़र ने लिखा है, "थेरो गोर्डो हिल पर हमेशा नज़र बनाए रखने के लिए रॉबर्ट आपको थैंक्यू! मैं आग जलाकर तारों भरे आसमान के नीचे बैठना चाहता हूं और रॉबर्ट की कहानियां सुनना चाहता हूं."
हालांकि रॉबर्ट को ये टिप्पणी देखने को नहीं मिली क्योंकि उनके पास कम्प्यूटर नहीं है.
वो कहते हैं, "मैं पुराने ज़माने का हूं. मैं जानवरों को पसंद करता हूं, एडवेंचर और सुंदर तारे मुझे पसंद हैं."
भारतीय अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान 2 पृथ्वी की कक्षा से निकलने के बाद मंगलवार की सुबह सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर गया.
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस जटिल ऑपरेशन के बाद अंतरिक्ष यान को चंद्रमा के ध्रुवों के ऊपर अंतिम कक्षा में प्रवेश कराया जाएगा, जहां चंद्रमा की सतह से इसकी दूरी 100 किलोमीटर होगी.
अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करके इसरो ने बताया है कि चंद्रयान 2 आने वाले 7 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा.
तीन लाख 84 हज़ार किलोमीटर की दूरी तय करके चांद की कक्षा में पहुंचा है. ये चंद्रयान 2 के लिए काफ़ी जटिल ऑपरेशन था.
लैंड करने से पहले चंद्रयान 2 के लूनर कैप्चर मिशन में सफलता हासिल करना काफ़ी अहम था क्योंकि ज़रा सी चूक एक बड़ा ख़तरा पैदा कर सकता था.
विज्ञान से जुड़े मामलों के जानकार पत्रकार पल्लव बागला ने बीबीसी संवाददाता गुरप्रीत सैनी कहा कि 'अगर चंद्रयान की रफ़्तार कम होती तो चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति यान को पूरी ताक़त से अपनी ओर खींचता और ऐसी स्थिति में चंद्रयान 2 चंद्रमा की सतह से टकराकर चकनाचूर हो सकता था.'
लूनर कैप्चर मिशन में सफलता के बाद अब चंद्रयान 2 को चांद की सतह पर उतारना एक बड़ी चुनौती होगी.
बागला का कहना है कि अगर ये मिशन सफल हो जाता है तो इसके बाद चंद्रयान 2 को चांद की और कई कक्षाओं में ले जाया जाएगा. इसमें रॉकेट फ़ायर किए जाएंगे.
फिर धीरे-धीरे उसकी ऑर्बिट को 100 किलोमीटर किया जाएगा. इसके बाद ऑर्बिट को 20 किलोमीटर किया जाएगा. इसके बाद लूनर लैंडर को यान से हटाकर चांद की सतह की ओर छोड़ा जाएगा.
लेकिन इसरो से पहले दुनिया की दूसरी अंतरिक्ष एजेंसियां भी इस मिशन को अंजाम दे चुकी हैं.

No comments:

Post a Comment