Friday, August 31, 2018

वो पांच बातें जो चिंपैंज़ी से सीख सकते हैं नेता

राजनीति' की बात करें तो हमारे ज़हन में एक ऐसे पेशे की छवि उभरती है जिसमें लगे लोग समय के मुताबिक़ अपने दोस्तों को दुश्मनों और दुश्मनों को दोस्तों में बदल सकते हैं. ऐसे लोग जो सत्ता के लिए तमाम समझौते कर सकते हों और व्यक्तियों और घटनाओं को अपने हित में इस्तेमाल करना जानते हों.
अगर ध्यान से देखें तो सत्ता को लेकर ऐसी आसक्ति चिंपैंज़ियों के समुदाय में भी देखने को मिलती है.
ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के प्रोफ़ेसर जेम्स टिली ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि चिंपैंज़ी समूहों के अंदर चलने वाले शक्ति संघर्ष से राजनीति के बारे में क्या सीखा जा सकता है.
चिंपैंज़ियों के बीच राजनीति की बात करें तो इस प्रजाति में निष्ठाएं बदलने का सिलसिला लगातार चलता है.
किसी भी समूह में अहमियत हासिल करने के लिए चिंपैंज़ियों को हमेशा अपने दोस्तों के ख़िलाफ़ जाने और दुश्मनों से मेलजोल करने के लिए तैयार रहना होता है.
चिंपैंज़ियों में बराबरी के स्तर पर गठबंधन होते देखे जाते हैं. इसका मतलब ये होता है कि दो कमजोर चिंपैंज़ी एक मजबूत चिंपैंज़ी के ख़िलाफ़ संघर्ष करेंगे.
इनमें ऐसा नहीं होता है कि कोई कमजोर चिंपैंज़ी किसी मजबूत चिंपैंज़ी के साथ गठबंधन करे.
ये एक तार्किक बात भी लगती है क्योंकि अगर हम किसी कमजोर के साथ गठबंधन करेंगे तो अपने साथी के साथ मिलकर हासिल किए गए सामान पर हमें ज़्यादा हक़ मिलने की संभावना रहती है.
वहीं, अगर दूसरा व्यक्ति मजबूत है तो हमारा हक़ कम होने की संभावना रहती है.
चिंपैंज़ियों के नेता काफ़ी डराने वाले और अपनी ताकत के दम पर राज करने वाले हो सकते हैं. लेकिन ऐसे नेता ज़्यादा दिन तक चलते नहीं हैं.
एक सफल नेता होने के लिए आपको अपने लिए समर्थन जुटाना होगा और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी. इसके लिए नेता को सहृदय और दृढ़ होना चाहिए.
इतिहास को देखें तो वो नेता सबसे ज़्यादा लंबे समय तक कुर्सी पर रहते हैं जिन्होंने लोगों के बीच संसाधन बांटकर समर्थन हासिल किया था.
बीबीसी रेडियो के एक कार्यक्रम में एक ऐसे चिंपैंज़ी के बारे में जानकारी दी गई थी जिसने 12 साल तक झोपड़ियों से मांस उठाकर बांटा और इस तरह राज किया.
चिंपैंज़ियों पर अध्ययन में ये जानकारी भी सामने आई कि अगर समूह पर बाहरी ख़तरा आता है तो चिंपैंज़ी समुदाय आपसी झगड़े भूलकर और एकजुट होकर ख़तरे का सामना करता है.
दिलचस्प बात ये है कि इंसानों की दुनिया में ऐसी चीज कोई असर नहीं डालती है. हालांकि, 9/11 के बाद पूरी दुनिया का एकजुट होना एक अपवाद हो सकता है.

Friday, August 17, 2018

播客节目强调妇女在气候行动中的作用

爱尔兰前总统玛丽·罗宾逊因其在气候正义方面的政策和宣传工作而闻名于世,但现在她决定在一个完全不同的领域开展斗争。在新的播客节目《发明之母》中,她和爱尔兰喜剧演员梅芙·希金斯一起赞美了身处于世界各地气候行动一线的女权主义者们。

前5集中,罗宾逊和希金斯采访了许多鼓舞人心的女性,包括立法禁止塑料袋的前肯尼亚环境部长朱迪·瓦克洪古、创立气候诉讼网络(   )的人权律师特莎·卡恩、以及帮助自己所在的社区适应气候变化的乌干达活动家康斯坦斯·奥克雷。

“我们采访了来自不同背景的非常优秀的女性”,罗宾逊告诉“中外对话”。

罗宾逊曾是一名律师,1990年成为爱尔兰首位女性总统,后担任联合国人权事务高级专员。过去15年间,作为全球人权领袖长者团体的一员以及潘基文的气候问题特使,罗宾逊通过“玛丽·罗宾逊-气候正义基金会”专注于气候正义方面的工作。

但罗宾逊仍认为应对气候问题的工作做得还不够,所以她找到了电影制作公司多克社会(Doc Society),希望可以让公众了解气候问题。多克社会建议罗宾逊和希金斯合作一档播客节目。希金斯曾制作过一档关于移民的播客节目,同时也是《纽约时报》的专栏作家。

这对组合看似奇怪,但两人都多才多艺、经验丰富,彼此间能够相辅相成;罗宾逊庄严,气场强大,拥有气候变化方面的专业知识,而希金斯则深谙播客媒体的运作方式,能活跃讨论氛围。

“我更加严肃一点,有时倾向于说教。虽然我离开了自己的舒适圈,但觉得这是有用的,”罗宾逊说。

另一方面,希金斯代表了广大公众。“在此之前,我显然意识到了气候变化的存在,但对气候正义了解不多,我被这个问题的广度吓到了,真的不知道该怎么做。但聆听这些女性的谈话,听她们的故事已经足以让我改变一点自己的生活。”

这档播客节目没有围绕气候变化展开科学探讨或辩论,而是审视气候变化的政治和道德维度,着眼于女权主义的解决方案。

“女权主义的方法更加以人为中心,”罗宾逊说。“它认识到了气候变化的不公正性;一些国家和社区对于气候变化的贡献虽然最少,但他们受到的影响却因为所处的地理位置,以及缺乏强大的抵御能力等原因而与他们所应承担的责任不成比例。但尽管如此,它们还是付出了最大的努力来增强自己的抵御能力。”

她指出,气候变化不是中性的。“女性受到的影响更大。遇到干旱,她们得付出更大的努力来找水和木柴,当飓风来袭,她们受的苦也更多。”

但罗宾逊很清楚,这意味着我们需要一个对每个人而言都公平的转型,包括那些因为化石燃料逐步淘汰而失去工作和生计的人。“他们将需要支持、培训和养老金。”男人也不例外。

“下期节目中,我们也想和采取逐步推进气候正义方法的男性女权主义者聊一聊。”

除了在气候变化的对话中加入更多女性的声音之外,她们都认为拓宽对多样性的认识是非常重要的。希金斯认为,气候变化与移民、种族等其他重要的社会问题有着内在联系。

“这是与他人结盟的非常好的方式——这就是玛丽的工作。”

罗宾逊仍在通过自己的基金会间接参与气候谈判。例如,她将在即将于波兰卡托维兹举行的联合国气候会谈上提出一个宣言,推动向清洁能源社会的公平过渡。

罗宾逊说,播客制作过程中与一位 “黑人的命也是命(Black Lives Matter)”活动家的一段对话让她倍受启发。这位年轻的活动家曾经在巴黎气候峰会的会场外抗议,而那个时候罗宾逊就在场内工作。”

两位制作人都对自己听到的故事充满热情。“关于气候变化的报道,悲观的太多了,”希金斯说。“我们很幸运,能发现这些充满希望的故事。”

尽管如此,罗宾逊说还有很多工作要做。她指出,自己出席的女性领导人会议对气候变化的重视仍不够,她自己国家在这个问题上的表现也是好换参半。

爱尔兰的人均碳排放量位列全球第三。今年早些时候,该国总理利奥·瓦拉德卡称爱尔兰是气候问题上的“落后者”。但同样在今年早些时候,爱尔兰成为首个承诺将公共资金撤出化石燃料投资的国家,罗宾逊为此感到骄傲。

因此,罗宾逊相信现在正是推出这样一档播客节目的好时机。“巴黎会谈之后,我们失去了一些的劲头,人们对待这个问题还不够认真,我们不能再浪费时间了。”

7月23日开始放送的前5期播客探讨了气候变化诉讼、撤资、食品、塑料和健康问题。罗宾逊和希金斯现在计划制作更多期节目,因为她们相信这个系列可以产生真正的影响。“我们很注意不去说教,”希金斯说。“但我发现自己知道的更多了,也更关心这个问题,我感到自己与这个问题建立了更强的联系。当初的惊慌失措已经不复存在。”

“我们希望最终能够发起一场运动,”罗宾逊说。“它的要素遍布世界各地——年轻人很重要,女性很重要,男性女权主义者也很重要。但如果我们采取一种“吓唬人”的方式……人们就会放弃。借助那些鼓舞人心的、积极的、现实的故事以及它们的能量和温暖会更加有效。”

Wednesday, August 8, 2018

हिरोशिमा और नागासाकी में वो क़यामत की सुबह

1945 आते आते एक आम जापानी की ज़िंदगी बहुत मुश्किल हो चुकी थी दुकानों में अंडे, दूध, चाय और कॉफ़ी पूरी तरह से ग़ायब हो चुके थे. स्कूलों के मैदानों और घरों के बगीचों में सब्ज़ियाँ उगाई जा रही थीं. पेट्रोल भी आम लोगों की पहुंच से बाहर हो चुका था.
सड़कों पर एक भी निजी कार नहीं दौड़ रही थीं. हिरोशिमा की सड़कों पर हर तरफ़ साइकिलें, पैदल चलते लोग और सैनिक वाहन दिखाई देते थे.
6 अगस्त, 1945 को सुबह 7 बजे जापानी रडारों ने दक्षिण की ओर से आते अमरीकी विमानों को देख लिया. चेतावनी के सायरन बज उठे और पूरे जापान में रेडियो कार्यक्रम रोक दिए गए.
जापान में तब तक पेट्रोल की इतनी कमी हो चुकी थी कि उन विमानों को रोकने के लिए कोई जापानी विमान नहीं भेजा गया. आठ बजते बजते चेतावनी उठा ली गई और रेडियो कार्यक्रम फिर से शुरू हो गए.
8 बज कर 9 मिनट पर अमरीकी वायु सेना के कर्नल पॉल टिबेट्स ने अपने बी- 29 विमान 'एनोला गे' के इंटरकॉम पर घोषणा की, 'अपने गॉगल्स लगा लीजिए और उन्हें अपने माथे पर रखिए.
जैसे ही उल्टी गिनती शुरू हो, उनको अपनी आँखों पर लगा लीजिए और तब तक लगाए रखिए जब तक आपको नीचे ज़बरदस्त रोशनी न दिखाई दे.'
विमान की बेली में 3.5 मीटर लंबा, 4 टन वज़न का नीला-सफ़ेद एटम बम 'लिटिल बॉय' रखा हुआ था. इसको टॉप सीक्रेट मैनहटन प्रोजेक्ट के तहत लॉस अलामोस, न्यू मैक्सिको की प्रयोगशालाओं में बनाया गया था. इसके अस्तित्व को इतना गुप्त रखा गया था कि अमरीका के उप राष्ट्पति हैरी ट्रूमैन को इसके बारे में पहली बार तब पता चला जब उन्होंने राष्ट्रपति रूज़वेल्ट की मृत्यु के बाद अमरीका के नए राष्ट्रपति का पदभार संभाला.
'एनोला गे' के दाहिने विंग से 10 मीटर की दूरी पर एक किलोमीटर पीछे एक दूसरा बी-29 विमान 'ग्रेट आर्टिस्ट' उड़ रहा था. एक तीसरा बमवर्षक भी था जिसे जॉर्ज मारक्वार्ड उड़ा रहे थे. उनकी अकेली ज़िम्मेदारी थी तस्वीरें लेना.
ठीक 8 बज कर 13 मिनट पर 'एनोला गे' के बॉम्बार्डियर मेजर टॉमस फ़ेरेबी के हेड फ़ोन पर कर्नल पॉल टिबेट्स का संदेश सुनाई दिया, 'इट इज़ ऑल यॉर्स.' फिर उन्होंने इंटरकॉम पर कहा, 'अपने गॉगल्स लगाइए.' फ़ेरेबी को जैसे ही गॉगल्स से अपना लक्ष्य अओई ब्रिज दिखाई दिया, वो चिल्लाए, 'आई हैव गॉट इट.'
ठीक 8 बज कर 15 मिनट पर 'एनोला गे' से नाक के बल 'लिटिल बॉय' हिरोशिमा के ऊपर गिरना शुरू हुआ.
लिटिल बॉय को एनोला गे से नीचे आने में पूरे 43 सेकेंड लगे. तेज़ हवाओं ने उसका रुख़ अपने लक्ष्य अओई ब्रिज से 250 मीटर दूर कर दिया और वो शीमा सर्जिकल क्लीनिक के ऊपर फटा. इसकी शक्ति 12500 टन टीएनटी के बराबर थी और जब ये फटा तो तापमान अचानक दस लाख सेंटीग्रेड पहुंच गया और ऊपर से द ग्रेट आर्टिस्ट के पायलेट मेजर चार्ल्स स्वीनी ने एक विशाल आग का गोला बनता देखा.
शहर के मध्य में एक क्षण के अंदर कंक्रीट इमारतों को छोड़ कर धरती के ऊपर मौजूद हर चीज़ ग़ायब हो गई. विस्फोट का असर इतना तेज़ था कि ग्राउंड ज़ीरो से 15 किलोमीटर दूर हर इमारत की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए.
हिरोशिमा शहर की दो तिहाई इमारतें एक सेकेंड के अंदर ध्वस्त हो गईं. कई किलोमीटर तक आग की एक आँधी सी फैल गई. एक क्षण में हिरोशिमा की कुल आबादी 2 लाख 50 हज़ार के 30 फ़ीसदी यानी 80 हज़ार लोग मौत की गर्त में समा गए.
जैसे ही विस्फोट हुआ 'एनोला गे' के आगे के केबिन में रोशनी फैल गई और पायलेट पॉल टिबेट्स ने अपने दाँतों में एक अजीब सी सिहरन महसूस की.
विमान के पिछले हिस्से में बैठे हुए टेल गनर बॉब कैरन ने अपना कोडक कैमरा उठाया और नीचे के दृश्य की तस्वीरें लेने लगे, नीचे के बैंगनी बादलों के बीच सफ़ेद धुएं का एक रेला 3000 फ़ीट तक उठा और उसने एक मशरूम की शक्ल बना ली.
एनोला गे के सह पायलट कैप्टेन रॉबर्ट लुइस ने अपनी लॉग बुक में लिखा, 'माई गॉड व्हाट हैव वी डन?' 'एनोला बे' के वेपेनियर विलियम पारसंस ने एक कूट संदेश भेजा, 'परिणाम सफल. विमान में हालात सामान्य.'
इमेज कॉपीरइट सूतोमू यामागुची की नज़र ऊपर उड़ रहे विमान पर पड़ी. उन्हें दिखाई दिया कि विमान से एक छोटी, काली वस्तु नीचे गिर रही है. अगले ही पल उनकी आँखों के सामने अंधा कर देने वाली रोशनी फैल गई. उनके सभी संवेदी अंगों ने काम करना बंद कर दिया. उन्होंने उंगलियों से अपनी आँखें ढकीं और ज़मीन पर मुंह के बल गिरे.उनके नीचे की घरती हिली और वो करीब आधा मीटर ऊपर उछले और फिर गिरे. जब उन्होंने अपनी आँखें खोली तो उनके चारों तरफ़ अंधेरा था.
अचानक उन्होंने महसूस किया कि अपने चेहरे के बांये हिस्से और बाईं बांह पर भयानक गर्मी महसूस की. उन्हें उल्टी करने की इच्छा महसूस हुई और वो बेहोश होने लगे. तभी उन्हें कुछ दूरी पर खड़ा एक पेड़ दिखाई दिया. उसकी सारी पत्तियाँ झड़ चुकी थीं.
उन्होंने उस पेड़ तक पहुंचने के लिए अपनी सारी ताक़त लगा दी. किसी तरह वहां पहुंच कर वो उसके तने के नीचे बैठ गए. तब तक उनका गला पूरी तरह से सूख चुका था और पानी की एक बूंद के लिए वो तरस रहे थे.