Wednesday, August 8, 2018

हिरोशिमा और नागासाकी में वो क़यामत की सुबह

1945 आते आते एक आम जापानी की ज़िंदगी बहुत मुश्किल हो चुकी थी दुकानों में अंडे, दूध, चाय और कॉफ़ी पूरी तरह से ग़ायब हो चुके थे. स्कूलों के मैदानों और घरों के बगीचों में सब्ज़ियाँ उगाई जा रही थीं. पेट्रोल भी आम लोगों की पहुंच से बाहर हो चुका था.
सड़कों पर एक भी निजी कार नहीं दौड़ रही थीं. हिरोशिमा की सड़कों पर हर तरफ़ साइकिलें, पैदल चलते लोग और सैनिक वाहन दिखाई देते थे.
6 अगस्त, 1945 को सुबह 7 बजे जापानी रडारों ने दक्षिण की ओर से आते अमरीकी विमानों को देख लिया. चेतावनी के सायरन बज उठे और पूरे जापान में रेडियो कार्यक्रम रोक दिए गए.
जापान में तब तक पेट्रोल की इतनी कमी हो चुकी थी कि उन विमानों को रोकने के लिए कोई जापानी विमान नहीं भेजा गया. आठ बजते बजते चेतावनी उठा ली गई और रेडियो कार्यक्रम फिर से शुरू हो गए.
8 बज कर 9 मिनट पर अमरीकी वायु सेना के कर्नल पॉल टिबेट्स ने अपने बी- 29 विमान 'एनोला गे' के इंटरकॉम पर घोषणा की, 'अपने गॉगल्स लगा लीजिए और उन्हें अपने माथे पर रखिए.
जैसे ही उल्टी गिनती शुरू हो, उनको अपनी आँखों पर लगा लीजिए और तब तक लगाए रखिए जब तक आपको नीचे ज़बरदस्त रोशनी न दिखाई दे.'
विमान की बेली में 3.5 मीटर लंबा, 4 टन वज़न का नीला-सफ़ेद एटम बम 'लिटिल बॉय' रखा हुआ था. इसको टॉप सीक्रेट मैनहटन प्रोजेक्ट के तहत लॉस अलामोस, न्यू मैक्सिको की प्रयोगशालाओं में बनाया गया था. इसके अस्तित्व को इतना गुप्त रखा गया था कि अमरीका के उप राष्ट्पति हैरी ट्रूमैन को इसके बारे में पहली बार तब पता चला जब उन्होंने राष्ट्रपति रूज़वेल्ट की मृत्यु के बाद अमरीका के नए राष्ट्रपति का पदभार संभाला.
'एनोला गे' के दाहिने विंग से 10 मीटर की दूरी पर एक किलोमीटर पीछे एक दूसरा बी-29 विमान 'ग्रेट आर्टिस्ट' उड़ रहा था. एक तीसरा बमवर्षक भी था जिसे जॉर्ज मारक्वार्ड उड़ा रहे थे. उनकी अकेली ज़िम्मेदारी थी तस्वीरें लेना.
ठीक 8 बज कर 13 मिनट पर 'एनोला गे' के बॉम्बार्डियर मेजर टॉमस फ़ेरेबी के हेड फ़ोन पर कर्नल पॉल टिबेट्स का संदेश सुनाई दिया, 'इट इज़ ऑल यॉर्स.' फिर उन्होंने इंटरकॉम पर कहा, 'अपने गॉगल्स लगाइए.' फ़ेरेबी को जैसे ही गॉगल्स से अपना लक्ष्य अओई ब्रिज दिखाई दिया, वो चिल्लाए, 'आई हैव गॉट इट.'
ठीक 8 बज कर 15 मिनट पर 'एनोला गे' से नाक के बल 'लिटिल बॉय' हिरोशिमा के ऊपर गिरना शुरू हुआ.
लिटिल बॉय को एनोला गे से नीचे आने में पूरे 43 सेकेंड लगे. तेज़ हवाओं ने उसका रुख़ अपने लक्ष्य अओई ब्रिज से 250 मीटर दूर कर दिया और वो शीमा सर्जिकल क्लीनिक के ऊपर फटा. इसकी शक्ति 12500 टन टीएनटी के बराबर थी और जब ये फटा तो तापमान अचानक दस लाख सेंटीग्रेड पहुंच गया और ऊपर से द ग्रेट आर्टिस्ट के पायलेट मेजर चार्ल्स स्वीनी ने एक विशाल आग का गोला बनता देखा.
शहर के मध्य में एक क्षण के अंदर कंक्रीट इमारतों को छोड़ कर धरती के ऊपर मौजूद हर चीज़ ग़ायब हो गई. विस्फोट का असर इतना तेज़ था कि ग्राउंड ज़ीरो से 15 किलोमीटर दूर हर इमारत की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए.
हिरोशिमा शहर की दो तिहाई इमारतें एक सेकेंड के अंदर ध्वस्त हो गईं. कई किलोमीटर तक आग की एक आँधी सी फैल गई. एक क्षण में हिरोशिमा की कुल आबादी 2 लाख 50 हज़ार के 30 फ़ीसदी यानी 80 हज़ार लोग मौत की गर्त में समा गए.
जैसे ही विस्फोट हुआ 'एनोला गे' के आगे के केबिन में रोशनी फैल गई और पायलेट पॉल टिबेट्स ने अपने दाँतों में एक अजीब सी सिहरन महसूस की.
विमान के पिछले हिस्से में बैठे हुए टेल गनर बॉब कैरन ने अपना कोडक कैमरा उठाया और नीचे के दृश्य की तस्वीरें लेने लगे, नीचे के बैंगनी बादलों के बीच सफ़ेद धुएं का एक रेला 3000 फ़ीट तक उठा और उसने एक मशरूम की शक्ल बना ली.
एनोला गे के सह पायलट कैप्टेन रॉबर्ट लुइस ने अपनी लॉग बुक में लिखा, 'माई गॉड व्हाट हैव वी डन?' 'एनोला बे' के वेपेनियर विलियम पारसंस ने एक कूट संदेश भेजा, 'परिणाम सफल. विमान में हालात सामान्य.'
इमेज कॉपीरइट सूतोमू यामागुची की नज़र ऊपर उड़ रहे विमान पर पड़ी. उन्हें दिखाई दिया कि विमान से एक छोटी, काली वस्तु नीचे गिर रही है. अगले ही पल उनकी आँखों के सामने अंधा कर देने वाली रोशनी फैल गई. उनके सभी संवेदी अंगों ने काम करना बंद कर दिया. उन्होंने उंगलियों से अपनी आँखें ढकीं और ज़मीन पर मुंह के बल गिरे.उनके नीचे की घरती हिली और वो करीब आधा मीटर ऊपर उछले और फिर गिरे. जब उन्होंने अपनी आँखें खोली तो उनके चारों तरफ़ अंधेरा था.
अचानक उन्होंने महसूस किया कि अपने चेहरे के बांये हिस्से और बाईं बांह पर भयानक गर्मी महसूस की. उन्हें उल्टी करने की इच्छा महसूस हुई और वो बेहोश होने लगे. तभी उन्हें कुछ दूरी पर खड़ा एक पेड़ दिखाई दिया. उसकी सारी पत्तियाँ झड़ चुकी थीं.
उन्होंने उस पेड़ तक पहुंचने के लिए अपनी सारी ताक़त लगा दी. किसी तरह वहां पहुंच कर वो उसके तने के नीचे बैठ गए. तब तक उनका गला पूरी तरह से सूख चुका था और पानी की एक बूंद के लिए वो तरस रहे थे.

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